एक ही काम, दो अलग प्रमाणपत्र? क्रिकेट, कॉरपोरेट ताक़त और “देशभक्ति” का दोहरा मापदंड

एक ही काम, दो अलग प्रमाणपत्र? क्रिकेट, कॉरपोरेट ताक़त और “देशभक्ति” का दोहरा मापदंड भारत में क्रिकेट अब सिर्फ़ खेल नहीं रहा, वह राजनीति, कॉरपोरेट ताक़त और राष्ट्रवाद की भाषा भी बोलने लगा है। इसी बीच एक गंभीर सवाल खड़ा होता हैक्या देशभक्ति का पैमाना सबके लिए एक-सा है, या यह ताक़त और पहचान देखकर… Continue reading

राजनीति, नफ़रत और व्यापार: मुसलमान को विलेन बनाने का पैटर्न

जब ग़ुस्सा धर्म पर उतरे और कारोबार सुरक्षित रहे आधुनिक राजनीति की सबसे ख़तरनाक चाल यह है कि वह जनता को असली सवालों से भटकाने के लिए एक स्थायी दुश्मन गढ़ देती है। आज भारतीय राजनीति में वह दुश्मन वह विलेन मुसलमान बना दिया गया है। बंगलादेश में एक हिंदू युवक की लिंचिंग होती है।… Continue reading