जज्बात की राजनीति या सियासी जाल: क्या हम अपनी ही हार की इबारत लिख रहे हैं?

सियासत में अक्सर जो दिखाई देता है, वह होता नहीं; और जो होता है, वह आसानी से समझ नहीं आता। हाल के चुनावी नतीजों ने इस सच को एक बार फिर सतह पर ला खड़ा किया है। पहले बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम, जहाँ सीमांचल की जमीन पर ओवैसी की पार्टी (AIMIM) ने अपनी… Continue reading

संघ–बीजेपी का ‘ओवैसी एजेंडा’ : ज़ुल्म, दंगे और ध्रुवीकरण से लंबा शासन

संघ–बीजेपी का ‘ओवैसी एजेंडा’ दरअसल ज़ुल्म, दंगों और सुनियोजित ध्रुवीकरण के ज़रिए लंबे शासन की एक गहरी राजनीतिक रणनीति है, जिसे समझे बिना आज देश में पैदा हो रही बेचैनी को समझा नहीं जा सकता। आज देश के एक बड़े हिस्से में, खासकर मुस्लिम नौजवानों के बीच गुस्सा, अपमान की पीड़ा, डर और साथ ही… Continue reading

जिस हालात में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्ध का आदेश दिया, उसी हालात में क़ुरआन ने जिहाद की अनुमति दी ?

आज अगर आप यह कह दें कि जिस हालात में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्ध का आदेश दिया, उसी हालात में क़ुरआन ने जिहाद की अनुमति दी तो बहुत लोग भड़क जाएँगे। लेकिन सच्चाई यह है कि पांडव और पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ एक ही तरह की स्थिति में खड़े थे। फर्क़ सिर्फ़ इतना है कि… Continue reading

क्या हमारी संवेदना भी अब धर्म देखकर तय होगी?

बंगलादेश में दीपू दास की लिंचिंग की घटना निस्संदेह दिल दहला देने वाली है। भीड़ द्वारा किसी भी इंसान की हत्या  चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या देश का हो  इंसानियत के ख़िलाफ़ अपराध है। दीपू दास की हत्या की जितनी निंदा की जाए, कम है। लेकिन इस घटना के बाद एक और सच्चाई… Continue reading