आज के दौर में इस्लाम पर सबसे ज़्यादा दोहराया जाने वाला आरोप यह है कि “जो व्यक्ति इस्लाम छोड़ दे, उसे मौत की सज़ा दी जाती है।” यह आरोप न केवल गंभीर है, बल्कि यह इस्लाम को असहिष्णु और हिंसक सिद्ध करने की कोशिश भी करता है। लेकिन सवाल यह है क्या यह दावा वास्तव में क़ुरआन पर आधारित है? या यह बाद के दौर की राजनीतिक व्याख्याओं का नतीजा है?
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