भारतीय मुसलमानों की पहचान को लेकर एक सुनियोजित वैचारिक जाल पिछले कुछ दशकों से लगातार बुना जा रहा है। भारतीय मीडिया और संप्रदायिक ताकतें जब मुसलमानों को “मुग़लों की औलाद” कहकर संबोधित करती हैं, तो यह केवल एक ऐतिहासिक भूल नहीं बल्कि एक राजनीतिक रणनीति है। यह रणनीति मुसलमानों को विदेशी, आक्रांता और सत्ता-लोलुप साबित… Continue reading