इतिहास का आईना: जब नफ़रत पैदा करने के लिए इतिहास को अधूरा पढ़ाया जाता है

आज भारत में जब भी “इतिहास” की बात होती है, तो कुछ तय नाम उछाले जाते हैं महमूद ग़ज़नवी, खिलजी, औरंगज़ेब। मानो इस देश में खून सिर्फ़ उन्हीं के दौर में बहा हो। लेकिन सवाल यह है क्या हिंसा का इतिहास सिर्फ़ मुस्लिम शासकों तक सीमित था? क्या हिंदू राजा, मराठा, राजपूत या सिख शासक… Continue reading

बर्गी मराठा, मुर्शिद क़ुली ख़ान और ‘आनंद मठ’ : इतिहास की सच्चाई बनाम सांप्रदायिक प्रोपेगैंडा

बंगाल का अठारहवीं सदी का इतिहास आज भी राजनीति और साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का शिकार है। बर्गी मराठों की लूट, बंगाल का आर्थिक संकट और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का उपन्यास ‘आनंद मठ’—इन तीनों को मिलाकर एक ऐसा नैरेटिव गढ़ा गया जिसमें हर तबाही का दोष मुस्लिम नवाबों पर डाल दिया गया। लेकिन ऐतिहासिक साक्ष्य इस सरलीकृत कहानी… Continue reading